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Sunday, May 26, 2013

नक्सलवादी हमले पर देश भर में व्यापक प्रतिक्रिया

प्रधानमन्त्री ने दिए सख्ती के संकेत 
नक्सलबाड़ी आन्दोलन से जुड़े संगठनों की ओर  से कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए हमले से एक बार फिर सार देश सन्न रह गया है। हर ओर से इस हमले की निंदा जारी है। इसी बीच प्रधानमन्त्री ने इस मामले में नयी सख्ती के संकेत भी दिए हैं। राहुल गाँधी सोनिया गन्दी उप राष्ट्रपति मोहम्मद  हामिद अंसारी और प्रधानमन्त्री सहित सभी ने इस पर ब्यान दिए हैं।
देश और दुनिया को हिला कर रख देने वाले वाले बड़े और सुनियोजित हमले पर देश भर में तीखी प्रतिक्रिया का सिलसिला जारी है। उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने इसे कायरतापूर्ण बताते हुए कहा है कि किसी भी सभ्य समाज में इस तरह के बर्बर और सम्वेदना हीन हमलों की कोई जगह नहीं होती।इसी बीच प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह और राष्ट्रिय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन
सोनिया गाँधी अपनी सभी व्यस्ततायों को बीच में ही छोड़ कर रायेपुर पहुँच गये।
बस्तर में कल हुए माओवादी हमले पर उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने कहा कि वे इस कायरतापूर्ण हमले की निंदा करते हैं जिसमें कई निर्दोष मारे गए जबकि कई अन्य घायल हो गये। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में ऐसे संवेदनाहीन और बर्बर कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है। श्री अंसारी ने कहा कि चरमपंथ और हिंसा के सभी पक्षों से मुकाबला किया जाना चाहिए और उन्हें अपने बीच से मिटा देना चाहिए। 
इस हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट करते हुए श्री अंसारी ने घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की भी कामना की। उप राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी भावनाएं और प्रार्थनाएं इस कठिन समय में उनके साथ हैं। श्री अंसारी ने कहा कि ईश्वर उन्हें इस दुःख से उबरने में साहस और धैर्य प्रदान करे। 
प्रधानमंत्री ने नक्सली हमले में घायल हुए लोगों से मुलाकात की, पीड़ित परिवारों को सहायता और अपराधियों को सज़ा दिलाने का संकल्प जताया प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कल छत्तीसगढ़ में हुई हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के साथ रायपुर अस्पताल का दौरा करके घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की। 
प्रधानमंत्री इस नृशंस हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से हिंसा के खिलाफ लड़ाई में देश की दृढ़ता में कमजोरी नहीं आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हमले के जिम्मेदार अपराधियों को जल्द ही कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने देश को आश्वासन भी दिया कि सरकार अपराधियों को सज़ा दिलाने के प्रति वचनबद्ध है। 
उन्होंने राज्य प्रशासन से घायलों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा उपचार देने को कहा। डॉ. मनमोहन सिंह ने घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष से पांच लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। 
प्रधानमंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ में सुरक्षा स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने स्थिति से निपटने के लिए राज्य को हर संभव सहायता देने का भी आश्वासन दिया। 
डॉ मनमोहन सिंह ने कहा कि इस तरह के बर्बर कृत्य करने वाले अपराधी क्षेत्र में विकास और शांति के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। 
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की निंदा की। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री के संदेश का अनूदित पाठ इस प्रकार है: 
"मैं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की कड़ी निंदा करता हूं। मैं उन लोगों के परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट करता हूं जिन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी। मैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री विद्याचरण शुक्ल सहित इस कायरतापूर्ण हमले में घायल लोगों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार के लिए दुआ करता हूं। 
मैंने राज्य के मुख्यमंत्री से बात की है और उनसे अनुरोध किया है कि घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा अपहृत लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 
मैं हमलावरों से अपील करता हूं कि अपहृत लोगों को जल्द से जल्द छोड़ दें। 
ऐसी घटनाएं हमारे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विरूद्ध हैं। सरकार किसी भी तरह की हिंसा के दोषी लोगों पर कड़ी कार्रवाई करेगी।" 
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सरकार के विरूद्ध युद्ध की तैयारी कर रहे नक्‍सलवादी                                 लाल सलाम 




Monday, January 14, 2013

साइबर युद्ध के लिए सबसे प्रभावकारी मालवेयर का विकास

साइबर युद्ध का ख़तरा-अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से
वर्ष 2013 में दुनिया भर में साइबर हमलों की संख्या में बड़ी तेज़गति से वृद्धि होगी। कुछ ख़ास ठिकानों पर ऐसे हमले किए जाएंगे और सरकारी एजेंसियों पर विशाल पैमाने के हमले भी होंगे। यह निष्कर्ष एंटीवायरस निगम "कैसपेर्स्की लैब" के विशेषज्ञों ने निकाला है। अमरीकी खुफिया सेवाओं ने भविष्यवाणी की है कि आनेवाले 20 वर्षों में वैश्विक साइबर युद्ध शुरू हो जाएगा।

"कैसपेर्स्की लैब" के विश्लेषकों के मुताबिक, अगले साल कई सरकारी संस्थानों और व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों की निजी कंपनियों की गोपनीय जानकारी की चोरी बड़े पैमाने पर होने लगेगी। सामाजिक सेवाओं और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर साइबर हमले अक्सर होने की सम्भावना है।

गूगल और फेसबुक जैसी बड़ी बड़ी नेटवर्क कंपनियों के पास भारी मात्रा में ऑनलाइन जानकारी हासल करने की क्षमता होगी। इसके अलावा, संचार प्रौद्योगिकी के विकास की तेज़गति की बदौलत देशों की सरकारों का अपने नागरिकों पर असीम नियंत्रण हो जाएगा। लेकिन इन देशों के नागरिकों के पास भी अपनी सरकारों को चुनौतियाँ देने के कई अवसर मौजूद होंगे।

वर्तमान में, सूचना प्रौद्योगिकी हमारे समाज के सूचना क्षेत्र के विकास के संदर्भ में एक बड़ा ख़तरा बनती जा रही है। इस संबंध में रूस के सूचना सुरक्षा संघ के अध्यक्ष गेन्नादी येमेलियानोव ने रेडियो रूस को बताया –

ऐसा ख़तरा इसलिए बढ़ता जाएगा क्योंकि इस ख़तरे का एक टाइमबम फिट कर दिया जा चुका है। यदि हम समय पर पर्याप्त सुरक्षा उपाये नहीं करेंगे तो यह बम ज़रूर फटेगा और बड़े विनाश का कारण बनेगा। जब हम सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के इतने ज्यादा आदी हो जाएंगे कि इसके बिना जीवन ही असंभव हो जाएगा तब पूरी दुनिया के लिए बहुत-सी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ज़रा सोचिए, इस सूचना प्रौद्योगिकी ने अचानक ही काम करना बंद कर दिया है। अब आप क्या करेंगे? पूरा जीवन ठप्प। आप ज़रा कल्पना कीजिए कि सभी स्थानों पर बिजली गुल हो गई है। सारा काम ठप्प। वित्तीय और आर्थिक कारणों से भी ऐसा ख़तरा पैदा हो सकता है। इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी को अच्छी तरह से समझने वाले एक बहुत अच्छे दिमाग़ की ही ज़रूरत होगी।

अमरीकी खुफिया सेवाओं ने अपने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को एक रिपोर्ट भेजी है जिसमें अमरीका के लिए मौजूदा साइबर हमलों के ख़तरों की समीक्षा की गई है। इसमें कहा गया है कि इस क्षेत्र में अमरीका के लिए सबसे बड़ा ख़तरा चीन से ही पैदा होगा। लॉस एंजिल्स टाइम्स में छपी इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रूस, फ्रांस, इज़राइल और दुनिया के कुछ अन्य देश भी साइबर जासूसी करते हैं लेकिन वे उतना विश्वासघात नहीं करेंगे जितना कि चीन कर सकता है। कम से कम रूस ऐसा नहीं कर रहा है। वह अपने व्यापारियों के लाभ के लिए अमरीकी कंपनियों की जानकारियां चुराने की कोशिशें नहीं कर रहा है।

इस बीच, दिसंबर माह की शुरूआत में साइबर रक्षा पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मंच साइबर सुरक्षा एशिया- 2012 के भागीदार इस बात पर सहमत हुए थे कि सूचना प्रौद्योगिकी की दुनिया की मुख्य समस्या यह है कि दुनिया की सरकारें अभी तक यह तय नहीं कर पाई हैः साइबर-आतंकवाद क्या चीज़ है? कुछ देशों की सरकारें साइबर युद्ध के लिए सबसे प्रभावकारी मालवेयर का विकास कर रही हैं। लेकिन कोई भी सरकार यह गारंटी नहीं दे सकती हैं कि ये मालवेयर और वायरस आतंकवादियों के लिए भी उपलब्ध नहीं हो सकेंगे। यदि ऐसा हुआ तो आतंकवादी गिरोह इन मालवेयरों और वायरसों का खूब इस्तेमाल करेंगे। इसलिए कहा जा सकता है कि आज भी दुनिया के कई देशों के लिए अपने ही साइबर संजाल में फंसने का बड़ा भारी ख़तरा बना हुआ है। माउस से एक ही “क्लिक” करने से पूरी सभ्यता का विनाश हो सकता है। (
रेडियो रूस से साभार)
13.12.2012, 16:32         
साइबर युद्ध का ख़तरा