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Monday, September 29, 2025

‘भारत मंथन-2025: नक्सल मुक्त भारत पर हुई विस्तृत चर्चा

गृह मंत्रालय//HM Amit Shah//Regarding Naxal Movement//28th September 2025 at 8:32 PM by PIB Delhi 
पीएम मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक का खात्मा दृढ़ता से दोहराया 
नई दिल्ली: 28 सितंबर 2025: (PIB Delhi//नक्सलबाड़ी स्क्रीन डेस्क)::
*केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में ‘भारत मंथन-2025: नक्सल मुक्त भारत, पीएम मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक का खात्मा’ के समापन सत्र को संबोधित किया

*1960 के दशक से अब तक, वामपंथी हिंसा में जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिन्होंने अपनों को खोया, शारीरिक व मानसिक विपदाएं झेलीं है, उन सभी को नमन करता हूँ

*जो लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि वामपंथी उग्रवाद विकास न पहुँच पाने के कारण फैला, वे देश को गुमराह कर रहे हैं

*जिनके हाथ में हथियार हैं, उन्हें आदिवासियों की चिंता नहीं है, बल्कि दुनियाभर से रिजेक्ट हो चुके वामपंथी विचार को जिंदा रखने की चिंता है

*नक्सल प्रभावित इलाकों तक विकास न पहुंचने के पीछे का एक मात्र कारण नक्सलवाद है


*जब तक नक्सलवाद को वैचारिक पोषण, लीगल समर्थन और वित्तीय पोषण करने वाले लोगों को एक्सपोज नहीं किया जाएगा, तब तक नक्सलवाद की समस्या समाप्त नहीं होगी

*एक जमाने में पशुपतिनाथ से तिरुपति तक फैले रेड कॉरिडोर का नारा लगाया जाता था, तो चिंता होती थी, मगर आज कोई इसका जिक्र करता है तो लोग हँसते हैं

*जब तक वामपंथी दल पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं आये तब तक वहाँ नक्सलवाद पनपा और जैसे ही वे सत्ता में आए, नक्सलवाद वहाँ से गायब हो गया

*हथियार छोड़ने वालों के लिए रेड-कार्पेट है, लेकिन निर्दोष आदिवासियों को नक्सली हिंसा से बचाना सरकार का धर्म है

*आत्मसमर्पण के बढ़ते आँकड़ें बताते हैं कि नक्सलियों के पास समय कम बचा है

*बड़े-बड़े लेख लिखकर सरकार को उपदेश देने वाले बुद्धिजीवी विक्टिम ट्राइबल के लिए लेख क्यों नहीं लिखते? उनकी संवेदना सिलेक्टिव क्यों है?

*मोदी सरकार सरेंडर की नीति को बढ़ावा देती है, मगर गोली का जवाब गोली से दिया जायेगा

*ऑपरेशन ब्लैक फारेस्ट के दौरान वामपंथी राजनीतिक दल अभियान को रुकवाने के लिए पत्र लिखकर गुहार लगाने लगे, जिससे उनका असली चेहरा सामने आ गया

*जब तक छत्तीसगढ़ में विपक्षी पार्टी की सरकार थी, संयुक्त अभियानों में अधिक सहयोग नहीं मिलता था, 2024 में हमारी पार्टी की सरकार बनने के एक साल में 290 नक्सलियों को मार गिराया गया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में ‘भारत मंथन-2025: नक्सल मुक्त भारत, पीएम मोदी के नेतृत्व में लाल आतंक का खात्मा’ के समापन सत्र को संबोधित किया।

इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च, 2026 तक भारत नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक भारतीय समाज नक्सलवाद का वैचारिक पोषण, कानून समर्थन और वित्तीय पोषण करने वाले लोगों को समझ नही लेता तब तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई समाप्त नहीं होगी। 

उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमाओं की सुरक्षा हमेशा से हमारी विचारधारा का प्रमुख अंग रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के मूल उद्देश्यों में तीन चीज़ें बहुत प्रमुख थीं- देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के सभी अंगों का पुनरूत्थान। केन्द्रीय गृह मंत्री ने 1960 के दशक से अब तक, वामपंथी हिंसा में जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिन्होंने अपनों को खोया, शारीरिक व मानसिक विपदाएं झेलीं है उन सभी लोगों को नमन किया। उन्होंने कहा कि जब तक वामपंथी दल पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं आये तब तक वहाँ नक्सलवाद पनपा और जैसे ही वे सत्ता में आए, नक्सलवाद वहाँ से गायब हो गया।

श्री अमित शाह ने कहा कि जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सत्ता संभाली तब देश की आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से तीन महत्वपूर्ण हॉटस्पॉट- जम्मू कश्मीर, नॉर्थईस्ट और वामपंथी कॉरिडोर, ने देश की आंतरिक सुरक्षा को छिन्न-भिन्न करके रखा था। उन्होंने कहा कि लगभग 4-5 दशकों से हज़ारों लोग इन तीनों जगहों पर पनपी औऱ फैली अशांति के कारण जान गंवा चुके थे, संपत्ति का बहुत नुकसान हुआ था, देश के बजट का बहुत बड़ा हिस्सा गरीबों के विकास की जगह इन हॉटस्पॉट को संभालने में जाता था और सुरक्षा बलों की भी अपार जानहानि हुई थी। उन्होंने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनते ही इन तीनों हॉटस्पॉट पर ध्यान केन्द्रित किया गया और स्पष्ट दीर्घकालीन रणनीति के आधार पर काम हुआ। New 

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि लगभग 70 के दशक की शुरूआत में नक्सलवाद और हथियारी विद्रोह की शुरूआत हुई। 1971 में स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे ज़्यादा 3620 हिंसक घटनाएं हुईं और इसके बाद 80 के दशक में पीपल्स वॉर ग्रुप ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, झारखंड बिहार और केरल तक इसका विस्तार किया। उन्होंने कहा कि 80 के दशक के बाद वामपंथी गुटों ने एक दूसरे में विलय की शुरूआत की और 2004 में प्रमुख सीपीआई (माओवादी) गुट का गठन हुआ और नक्सली हिंसा ने बहुत गंभीर स्वरूप ले लिया। उन्होंने कहा कि पशुपति से तिरुपति कॉरिडोर को रेड कॉरिडोर के रूप में जाना जाता था।

श्री अमित शाह ने कहा कि देश के भूभाग का 17 प्रतिशत हिस्सा रेड कॉरिडोर में समाहित था और इस समस्या से 12 करोड़ की आबादी प्रभावित थी। उस वक्त की आबादी का 10 प्रतिशत हिस्सा नक्सलवाद का दंश झेलकर अपना जीवन बिता रहा था। श्री शाह ने कहा उसकी तुलना में दो अन्य हॉटस्पॉट–कश्मीर में 1 प्रतिशत भूभाग आतंकवाद औऱ पूर्वोत्तर में देश का 3.3. प्रतिशत भूभाग अशांति से ग्रस्त था। उन्होंने कहा कि जब 2014 में श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने तब मोदी सरकार ने संवाद, सुरक्षा और समन्वय के तीनों पहलुओं पर काम करने की शुरूआत की। इसके परिणामस्वरूप  31 मार्च, 2026 को इस देश से हथियारी नक्सलवाद समाप्त हो जाएगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि जहां पहले scattered approach से काम होता था, घटना-आधारित रिस्पॉंस होता था और कोई स्थायी नीति नहीं थी। एक प्रकार से कहें तो सरकार के रिस्पॉंस का स्टीयरिंग नक्सलियों के हाथों में था। श्री शाह ने कहा कि 2014 के बाद सरकार के अभियानों, कार्यक्रमों का स्टीयरिंग भारत सरकार के गृह मंत्रालय के पास है औऱ यह एक बहुत बड़ा नीतिगत परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि scattered approach की जगह unified और ruthless approach को अपनाने का काम मोदी सरकार ने किया है।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की नीति है जो हथियार छोड़कर सरेंडर करना चाहते हैं, उनके लिए रेड कार्पेट है और उनका स्वागत है, लेकिन अगर हथियार लेकर निर्दोष आदिवासियों को मारना चाहते हैं तो सरकार का धर्म निर्दोष आदिवासियों बचाना और हथियारबंद नक्सलियों का सामना करना है।

श्री अमित शाह ने कहा कि पहली बार भारत सरकार ने बिना किसी कन्फ्यूज़न के एक स्पष्ट नीति अपनाई। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस और केन्द्रीय सुरक्षाबलों को हमने छूट दी और इंटेलीजेंस, इन्फॉर्मेशन शेयरिंग तथा ऑपरेशन में कोऑर्डिनेशन के लिए भारत सरकार और राज्य सरकारों के बीच एक व्यावहारिक सेतु बनाया गया। उन्होंने कहा कि आर्म्स और अम्युनिशन की सप्लाई पर नकेल कसी गई। 2019 के बाद हमें उनकी सप्लाई को लगभग 90 प्रतिशत से अधिक रोकेने में सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों का वित्तपोषण करने वालों पर एनआईए और ईडी ने नकेल कसी है, साथ ही हम नक्सलवादियों के अर्बन नक्सल सपोर्ट, लीगल सहायता औऱ मीडिया नरेटिव गढ़ने से भी लड़े हैं। उन्होंने कहा कि हमने सेंट्रल कमिटी के मेंबर्स पर लक्षित तरीके से कार्रवाई की और 18 से अधिक सेंट्रल कमिटी के मेंबर 19 अगस्त से आज तक न्यूट्रलाइज़ किए जा चुके हैं। गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा वैक्यूम भरने का काम भी किया गया है और ऑपरेशन ऑक्टोपस और ऑपरेशन डबल बुल जैसे टारगेटेड ऑपरेशन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डीआरजी, एसटीएफ, सीआरपीएफ और कोबरा की संयुक्त ट्रेनिंग की भी शुरूआत की। चारों अब मिलकर अभियान चलाते हैं और उसका चेन ऑफ कमांड भी अब स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि एकीकृत प्रशिक्षण से हमारी सफलता में बहुत अंतर आया है। इसके साथ-साथ फॉरेंसिक जांच शुरू की गई, लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम उपलब्ध कराया गया, मोबाइल फोन की गतिविधियों को राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया गया, साइंटिफिक कॉल लॉग्स एनालिसिस के सॉफ्टवेयर बने औऱ सोशल मीडिया एनालिसिस से भी उनके छुपे हुए सपोर्टर्स को ढूंढने का काम हुआ। इससे नक्सल विरोधी अभियान में न सिर्फ तेज़ी आई बल्कि वे सफल औऱ परिणामलक्षी भी हुए।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2019 के बाद हमने राज्यों के क्षमता निर्माण पर भी बल दिया। SRE और SIS योजना के तहत लगभग 3331 करोड़ रूपए जारी किए गए, जो लगभग 55 प्रतिशत की वद्धि दर्शाता है। इसके माध्यम से फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बढ़ाए गए और इस पर लगभग 1741 करोड़ रूपए खर्च हुए। उन्होंने कहा कि पिछले 6 साल में 336 नए सीएपीएफ के कैंप बनाकर सुरक्षा के वैक्यूम को भरने का काम मोदी सरकार ने किया। इसके परिणामस्वरूप 2004 -14 के मुकाबले 2014-24 में सुरक्षाबलों की मृत्यु में 73 प्रतिशत की कमी आई औऱ नागरिकों की मृत्यु में 74 प्रतिशत कमी आई। श्री शाह ने कहा कि पहले हमें छत्तीसगढ़ में सफलता नहीं मिलती थी क्योंकि वहाँ विपक्ष की सरकार थी। 2024 में हमारी सरकार बनी और 2024 में किसी एक साल के में सबसे अधिक 290 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज़ करने का काम किया गया।

गृह मंत्री ने कहा कि हम किसी को नहीं मारना चाहते। उन्होंने कहा कि  290 न्यूट्रलाइज़्ड नक्सलियों के मुकाबले 1090 गिरफ्तार किए और 881 ने सरेंडर किया। उन्होंने कहा कि यह बताता है कि सरकार की  अप्रोच क्या है। हम पूरा प्रयास करते हैं कि नक्सली को सरेंडर या अरेस्ट करने का पूरा मौका दिया जाता है। लेकिन जब नक्सलवादी हाथ में हथियार लेकर भारत के निर्दोष नागरिकों को मारने निकलते हैं तो सुरक्षाबलों के पास कोई और चारा नहीं होता और उन्हें गोली का जवाब गोली से ही देना होता है। श्री शाह ने कहा कि 2025 में अब तक 270 नक्सलियों को न्यूट्रलाइज़ किया गया है, 680 गिरफ्तार किए गए हैं और 1225 ने आत्मसमर्पण किया है। दोनों वर्षों में आत्मसमर्पण और अरेस्ट की संख्या न्यूट्रलाइज़्ड की संख्या से अधिक है। आत्मसमर्पण करने वालों की संख्या बताती है कि नक्सलियों का समय अब बहुत कम बचा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर Karregutaa hiils पर बहुत बड़ा कैंप बनाया था जहां बहुत सारे हथियार थे, दो साल का राशन था, हथियार और आईईडी बनाने की फैक्ट्रियां थी और वहां पहुंचना बहुत मुश्किल था। उन्होंने कहा कि 23 मई 2025 को उनके इस कैंप को ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट में नष्ट कर दिया गया औऱ 27 हार्डकोर नक्सली मारे गए। साथ ही बीजापुर में 24 हार्डकोर नक्सली मारे गए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि इस ऑपरेशन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में बचेखुचे नक्सलियों की रीढ़ टूट गई है। श्री शाह ने कहा कि वर्ष 2024 में जो नक्सली न्यूट्रलाइज़्ड किए गए, उनमें 1 जोनल कमिटी मेंबर, 5 सबज़ोनल कमिटी मेंबर, 2 स्टेट कमिटी मेंबर, 31 डिविज़नल कमिटी मेंबर और 59 एरिया कमिटी मेंबर शामिल हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 1960 से 2014 तक कुल 66 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन थे और मोदी सरकार के 10 साल में नए 576 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बनाने का काम हुआ। 2014 में 126 नक्सलाइट ज़िले थे, अब 18 नक्सलाइट ज़िले ही बचे हैं। मोस्ट अफेक्टेड ज़िले 36 से घटकर 6 बचे हैं। पुलिस स्टेशन लगभग 330 थे अब 151 रह गए हैं और इनमें भी 41 नए बनाए गए पुलिस स्टेशन हैं। पिछले 6 साल में 336 सुरक्षा कैंप बनाए गए और नाइट लैंडिंग के लिए 68 हैलीपैड बनाए गए हैं। हमारे सीआरपीएफ के जवानों के लिए हमने 76 नाइट लैंडिंग हैलीपैड बनाए हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की आय़ कम करने के लिए एनआईए, ईडी और राज्य सरकारों ने करोडों रूपए की संपत्तियां ज़ब्त की हैं। गृह मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के समन्वय के लिए भी उनके स्तर पर मुख्यमंत्रियों के साथ 12 बैठकें हुई हैं और अकेले छत्तीसगढ़ में 8 बैठकें हुई हैं। छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों के आत्मसमर्पण के लिए ल्यूक्रेटिव पैकेज लाई है। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादी क्षेत्र में विकास के लिए भी कई काम किए गए हैं। गृह मंत्री ने कहा कि दुनिया में जहां भी वामपंथी विचारधारा पनपी, वहां वामपंथी विचारधारा औऱ हिंसा का चोली दामन का रिश्ता रहा है औऱ यही नक्सलवाद की जड़ है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जो लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि वामपंथी उग्रवाद का मूल कारण विकास है वे देश को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 60 करोड़ गरीबों के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी अनेक योजनाएं लाए हैं, नक्सलवादी क्षेत्र में कौन इन योजनाओं को नहीं पहुंचने देता। उन्होंने कहा कि सुकमा या बीजापुर में स्कूल नहीं पहुंचा तो उसका दोषी कौन है। वामपंथी क्षेत्र में सड़कें क्यों नहीं बन सकीं क्योंकि नक्सलियों ने कॉट्रैक्टर्स की हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े लेख लिखकर सरकार को उपदेश देने वाले बुद्धिजीवी विक्टिम ट्राइबल के लिए लेख क्यों नहीं लिखते? उनकी संवेदना सिलेक्टिव क्यों है? उन्होंने कहा कि न तो नक्सलियों के समर्थक आदिवासियों का विकास चाहते और न ही उनके मन में उनकी चिंता है, बल्कि उन्हें दुनियाभर में रिजेक्ट होती अपनी विचारधारा को ज़िदा रखने की चिंता है। श्री शाह ने  कहा कि विकास न पहुंचने का एकमात्र कारण वामपंथी विचारधारा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों ने पहला निशाना संविधान और फिर न्यायिक व्यवस्था को बनाया। संवैधानिक वैक्यूम खड़ा किया और फिर स्टेट की कल्पना को निशाना बनाया और स्टेट का वैक्यूम खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जो भी उनके साथ नहीं जुड़े उन्हें स्टेट का इन्फॉर्मर बनाकर जनता की अदालत में फांसी की घोषणा कर दी।

इन्होंने पैरेलल सरकार बनाई। श्री शाह ने कहा कि देश के कल्याण के लिए अपनी विचारधारा से उपर उठने की ज़रूरत है।  उन्होंने कहा कि गवर्नेंस के वैक्यूम के कारण ही वहाँ  विकास, साक्षरता, स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच सकी हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन ब्लैक फारेस्ट के दौरान वामपंथी राजनीतिक दल अभियान को रुकवाने के लिए पत्र लिखकर गुहार लगाने लगे, जिससे उनका असली चेहरा सामने आ गया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के साथ कोई सीज़फायर नहीं होगा। अगर उन्हें सरेंडर करना है तो सीज़फायर करने की ज़रूरत ही नहीं है, उन्हें हथियार डाल देने चाहिए। पुलिस एक भी गोली नहीं चलाएगी और उन्हें रिस्टेब्लिश करेगी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन ब्लैक फ़ॉरेस्ट होते ही नक्सलियों के समर्थकों की सारी छद्म सिम्पैथी एक्सपोज़ हो गई।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 2014-2024 के दौरान वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में 12 हज़ार किलोमीटर सड़कें बनी हैं, 17,500 सड़कों के लिए बजट स्वीकृत हुआ, 6300 करोड़ रूपए की लागत से 5000 मोबाइल टॉवर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि 1060 बैंक शाखाएं खोली गई, 937 एटीएम लगाए गए, 37,850 बैंकिग कॉरेस्पॉडेंट्स बनाए गए, 5899 डाकघर खोले गए, 850 स्कूल और 186 अच्छे स्वास्थ्य केन्द खोले गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नियद नेल्लानार योजना के तहत आयुष्मान भारत कार्ड, आधार कार्ड, वोटिंग कार्ड, स्कूल बनाना, राशन दुकान, आंगनवाड़ी स्वीकृत करने के काम में लगी है।

पूर्वोत्तर में उग्रवाद का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में 2004-2014 की तुलना में  2014-2024 में सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु में 70 प्रतिशत की कमी आई है। इसी प्रकार, 2004-14 की तुलना में 2014-24 में नागरिकों की मृत्यु में 85 प्रतिशत की कमी आई है। मोदी सरकार ने 12 महत्वपूर्ण शांति समझौते कर हाथ में हथियार लेकर घूमने वाले 10,500 युवाओं को सरेंडर कर मेनस्ट्रीम में लाने का काम किया। उन्होंने कहा कि एक ज़माने में पूरा पूर्वोत्तर अपने आप को देश से कटा हुआ महसूस करता था लेकिन आज आज पूर्वोत्तर ट्रेन, रेलवे, और विमान से जुड़ा हुआ है। श्री शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने भौतिक दूरी के साथ ही दिल्ली औऱ नॉर्थईस्ट के बीच दिलों की दूरी भी कम करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आज पूर्वोत्तर शांति और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में 2019 में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में धारा 370 को समाप्त कर दिया गया। उसके बाद सरकार ने सुनियोजित तरीके से विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन से जनता का विश्वास अर्जित किया। उन्होंने कहा कि कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंक के सामने बहुत सुनियोजित नीति के तहत मोदी सरकार ने काम किया। श्री शाह ने कहा कि 2004-14 में 7300 हिंसक घटनाओं के मुकाबले 2014-24 में 1800 हिंसक घटनाए हुई हैं। सुरक्षाकर्मियों की मृत्यु में 65 प्रतिशत और नागरिकों की मृत्यु में 77 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि देश का हर कानून आज वहां अमल में है। जम्मू कश्मीर में आज़ादी के बाद पहली बार पंचायत चुनाव हुए और 99.8 प्रतिशत मतदान हुआ। श्री शाह ने कहा कि हम जम्मू कश्मीर में आतंकवाद की समस्या को धीरे धीरे सुलझाने के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।

***//आरके / वीवी / आरआर / पीआर//(रिलीज़ आईडी: 2172501)

Sunday, September 26, 2021

नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद पर समीक्षा बैठक

प्रविष्टि तिथि: 26 SEP 2021 4:10 PM by PIB Delhi

 केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने  की अध्यक्षता 


नई दिल्ली
: 26 सितंबर 2021: (पीआईबी//नक्सलबाड़ी स्क्रीन ब्यूरो)::

नक्सलवाद से प्रभावित राज्यों की समीक्षा के लिए एक विशेष बैठक गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई। जिसमें कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। विच्जविमर्श में कई बातें उभर कर सामने आईं। जो तथ्य और नुक्ते इस समीक्षा में सामने आए उनका संक्षिप्त रूप हम सबसे पहले दे रहे हैं। 

*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कटिबद्ध है

*प्रधानमंत्री की अगुवाई में वामपंथी उग्रवाद पर नकेल कसने में मिल रही है सफलता 

*केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से लगातार कामयाबी मिल रही है 

*दशकों की लड़ाई में हम ऐसे मुकाम पर पहुंचे हैं जहाँ सफलता निकट है 

*पहली बार मृत्यु की संख्या 200 से कम है और यह बहुत बड़ी उपलब्धि है

*जब तक हम वामपंथी उग्रवाद की समस्या से पूरी तरह निजात नहीं पाते तब तक देश का और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों का पूर्ण विकास संभव नहीं

*प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की तैनाती पर होने वाले राज्यों के स्थायी ख़र्च में कमी लाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है

*इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2018-19 के मुक़ाबले 2019-20 में CAPFs की तैनाती पर होने वाले राज्यों के ख़र्च में लगभग 2900 करोड़ रूपए की कमी आई है

*भारत सरकार कई सालों से राजनीतिक दलों पर ध्यान दिये बिना दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ती रही है, जो हथियार छोड़कर लोकतंत्र का हिस्सा बनना चाहते हैं उनका दिल से स्वागत है लेकिन जो हथियार उठाकर निर्दोष लोगों और पुलिस को आहत करेंगे, उनको उसी तरह जवाब दिया जायेगा

*असंतोष का मूल कारण आज़ादी के बाद 6 दशकों में विकास ना पहुंच पाना है, लेकिन अब प्रधानमंत्री जी की अगुवाई में विकास हो रहा है और नक्सली भी ये बात समझ चुके हैं कि विकास होने पर निर्दोष लोग उनके बहकावे में नहीं आएंगे इसीलिए विकास की गति निर्बाध रूप से जारी रखना बहुत ज़रूरी है

*जिस समस्या के कारण पिछले 40 वर्षों में 16 हज़ार से अधिक नागरिकों की जान गई हैं, उसके ख़िलाफ़ लड़ाई अब अंत तक पहुंची है और इसकी गति बढ़ाने और इसे निर्णायक बनाने की ज़रूरत है

*हाल ही में भारत सरकार ने अनेक उग्रवादी गुटों, विशेषकर उत्तरपूर्व में, के साथ समझौता कर उनसे हथियार डलवाने में सफलता हासिल की है

*वामपंथी उग्रवादियों के आय के स्रोतों को निष्प्रभावी करना बेहद ज़रूरी है

अब चर्चा विस्तार से:

भारत सरकार वाम उग्रवाद को समाप्त करने में लगातार सक्रिय है। जंग और नीति दोनों पर ध्यान दिया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री, श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केन्द्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री, श्री गिरिराज सिंह, जनजातीय मामलों के मंत्री श्री अर्जुन मुंडा, दूरसंचार, सूचना-प्रौद्योगिकी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह और केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय भी उपस्थित थे। 

बैठक में बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्री और आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और केरल के वरिष्ठ अधिकारी, केन्द्रीय गृह सचिव, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के शीर्ष अधिकारी और केन्द्र तथा राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह आनंद का विषय है कि प्रधानमंत्री जी की अगुवाई में वामपंथी उग्रवाद पर नकेल कसने में केंद्र और राज्यों के साझा प्रयासों से बहुत सफलता मिली है। श्री शाह ने कहा कि एक तरफ जहां वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 23 प्रतिशत की कमी आई है वहीं मौतों की संख्या में 21 प्रतिशत की कमी आई है। श्री अमित शाह ने कहा कि दशकों की लड़ाई में हम एक ऐसे मुकाम पर पहुंचे हैं जिसमें पहली बार मृत्यु की संख्या 200 से कम है और यह हम सबकी साझा और बहुत बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि हम सब जानते हैं कि जब तक हम वामपंथी उग्रवाद की समस्या से पूरी तरह निजात नहीं पाते तब तक देश का और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों का पूर्ण विकास संभव नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इसको खत्म किए बिना न तो लोकतन्त्र को नीचे तक प्रसारित कर पाएंगे और न ही अविकसित क्षेत्रों का विकास कर पाएंगे, इसलिए हमने अब तक जो हासिल किया है उस पर संतोष करने की बजाय जो बाकी है उसे प्राप्त करने के लिए गति बढ़ाने की जरूरत है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार कई सालों से राजनीतिक दलों पर ध्यान दिये बिना दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ती रही है। श्री शाह ने कहा कि जो हथियार छोड़कर लोकतंत्र का हिस्सा बनना चाहते हैं उनका दिल से स्वागत है लेकिन जो हथियार उठाकर निर्दोष लोगों और पुलिस को आहत करेंगे, उनको उसी तरह जवाब दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि असंतोष का मूल कारण है आज़ादी के बाद पिछले 6 दशकों में विकास ना पहुंच पाना, इससे निपटने के लिए वहां तेज़ गति से विकास पहुंचाना और आम जनता और निर्दोष लोग उनके साथ ना जुड़ें, ऐसी व्यवस्था करना अति आवश्यक है। श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकास हो रहा है और अब नक्सली भी ये बात समझ चुके हैं कि विकास होने पर निर्दोष लोग उनके बहकावे में नहीं आएंगे इसीलिए विकास की गति निर्बाध रूप से जारी रखना बहुत ज़रूरी है। इन दोनों मोर्चों पर सफल होने के लिए ये बैठक बहुत मह्त्वपूर्ण है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए प्रभावित राज्यों के मुख्य सचिव कम से कम हर तीन महीने में पुलिस महानिदेशक और केन्द्रीय ऐजेंसियों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करें, तभी हम इस लड़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में जिन क्षेत्रों में सुरक्षा पहुंच नहीं थी, वहां सुरक्षा कैंप बढ़ाने का काफी बड़ा और सफल प्रयास किया गया है, विशेषकर छत्तीसगढ़ में, साथ ही महाराष्ट्र और ओडिशा में भी सुरक्षा कैंप बढ़ाए गए हैं। श्री शाह ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के स्तर पर नियमित समीक्षा की जाती है, तो निचले स्तर पर समन्वय की समस्याएं अपने आप हल हो जाएंगी। श्री अमित शाह ने कहा कि जिस समस्या के कारण पिछले 40 वर्षों में 16 हज़ार से अधिक नागरिकों की जान गई हैं, उसके ख़िलाफ़ लड़ाई अब अंत तक पहुंची है और इसकी गति बढ़ाने और इसे निर्णायक बनाने की ज़रूरत है।

श्री अमित शाह ने कहा कि हाल ही में भारत सरकार ने अनेक उग्रवादी गुटों, विशेषकर उत्तरपूर्व में, के साथ समझौता कर उनसे हथियार डलवाने में सफलता हासिल की है। बोड़ोलैंड समझौता, ब्रू समझौता, कार्बी आंगलोंग समझौता और त्रिपुरा के उग्रवादियों द्वारा आत्मसमर्पण समेत अबतक लगभग 16 हज़ार कैडर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जितने भी लोग हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में आना चाहते हैं, उनका हम स्वागत करते हैं।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि राज्य प्रशासन को सक्रिय होकर केन्द्रीय बलों के साथ तालमेल के साथ आगे बढ़ना चाहिए। श्री अमित शाह ने कहा कि केन्द्रीय बलों के बारे में जिन राज्यों ने मांग भेजी हैं, उन्हें पूरा करने का प्रयास किया गया है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) की तैनाती पर होने वाले राज्यों के स्थायी ख़र्च में कमी लाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2018-19 के मुक़ाबले 2019-20 में CAPFs की तैनाती पर होने वाले राज्यों के ख़र्च में लगभग 2900 करोड़ रूपए की कमी आई है। प्रधानमंत्री ने निरंतर इसकी समीक्षा की है और लगातार हम सबका मार्गदर्शन कर रहे हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों के आय के स्रोतों को निष्प्रभावी करना बेहद ज़रूरी है। केन्द्र और राज्य सरकारों की ऐजेंसियों को मिलकर एक व्यवस्था बनाकर इसे रोकने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों से आग्रह करते हुए कहा कि वे वामपंथी उग्रवाद की समस्या को अगले एक साल तक प्राथमिकता दें, जिससे इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए दबाव बनाने, गति बढ़ाने और बेहतर समन्वय की ज़रूरत है।

वामपंथी उग्रवाद पिछले कई दशकों से एक अहम सुरक्षा चुनौती रहा है। हालांकि यह मुख्य रूप से राज्य का विषय है लेकिन केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने वामपंथी उग्रवाद के ख़तरे से समग्र रूप से निपटने के लिए 2015 से एक ‘राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना' बनाई है। इस योजना की प्रगति और स्थिति की लगातार सघन निगरानी की जा रही है और यह एक बहुआयामी दृष्टिकोण वाली नीति है।

प्रभावित क्षेत्रों में ग़रीब और कमज़ोर वर्ग तक विकास पहुंचाने के लिए विकासशील गतिविधियों पर अधिक ज़ोर देने के साथ ही हिंसा के प्रति शून्य सहिष्णुता, वामपंथी उग्रवाद के ख़तरे से निपटने की ‘राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

इस नीति के अंतर्गत, केन्द्रीय गृह मंत्रालय, सीएपीएफ बटालियनों की तैनाती, हेलीकॉप्टरों और यूएवी के प्रावधान और भारतीय रिजर्व बटालियनों (आईआरबी) / विशेष भारत रिजर्व बटालियनों (एसआईआरबी) की मंजूरी के जरिए क्षमता निर्माण और सुरक्षा तंत्र की मज़बूती के लिए राज्य सरकारों को समर्थन दे रहा है। राज्य पुलिस के आधुनिकीकरण और प्रशिक्षण के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण (एमपीएफ), सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना और विशेष बुनियादी ढांचा योजना (एसआईएस) के तहत भी धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।

वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों के विकास के लिए, भारत सरकार ने कई विकासात्मक पहल की हैं जिनमें 17,600 किलोमीटर सड़कों को मंज़ूरी शामिल है, जिसमें से 9,343 किलोमीटर सड़कों का निर्माण आरआरपी-I, आरसीपीएलडब्ल्यूई के तहत पूरा हो चुका है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों में दूरसंचार सुविधाओं में सुधार के लिए 2,343 नए मोबाइल टावर लगाए गए हैं और अगले 18 महीनों में 2,542 अतिरिक्त टावर लगाए जाएंगे। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों में लोगों के वित्तीय समावेशन के लिए 1,789 डाकघर, 1,236 बैंक शाखाएं, 1,077 एटीएम और 14,230 बैंकिंग प्रतिनिधि खोले गए हैं और अगले एक वर्ष में 3,114 डाकघर और खोले जाएंगे। वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) खोलने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों के लिए कुल 234 ईएमआरएस स्वीकृत किए गए हैं, इनमें से 119 कार्यरत हैं।

सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों में विकास को और गति देने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के तहत, 10,000 से अधिक परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें से 80% से अधिक पूरी हो चुकी हैं। इस योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों को 2,698.24 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। एसआईएस के तहत 992 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंज़ूरी दी गई है और 152 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी कर दी गई है। एसआरई के तहत अप्रैल, 2014 से पिछले 7 वर्षों में 1,992 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है, जो कि सात वर्षों से पहले की अवधि की तुलना में 85% अधिक है।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने कुछ ज़िलों को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित ज़िलों के रूप में वर्गीकृत किया था और वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए प्रभावित राज्यों को विशिष्ट संसाधन जुटाने के लिए सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत कवर किया था। इन एसआरई जिलों में से, देश भर में वामपंथी उग्रवाद संबंधी हिंसा वाले ज़िलों में से 85% से अधिक जिलों को सुरक्षा और विकास से संबंधित संसाधनों की केन्द्रित उपलब्धता के लिए 'सबसे अधिक प्रभावित ज़िलों' के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

पिछले एक दशक में, हिंसा के आंकड़ों और इसके भौगोलिक फैलाव, दोनों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। वामपंथी उग्रवाद संबंधित हिंसा की घटनाएं 2009 में 2,258 के उच्चतम स्तर से 70% कम होकर वर्ष 2020 में 665 रह गई हैं। मौतों की संख्या में भी 82% की कमी आई है जो वर्ष 2010 में दर्ज 1,005 के उच्चतम आंकड़े से घटकर वर्ष 2020 में 183 रह गई हैं। माओवादियों के प्रभाव वाले ज़िलों की संख्या भी वर्ष 2010 में 96 से वर्ष 2020 में घटकर सिर्फ 53 ज़िलों तक सीमित रह गई है। माओवादियों को अब सिर्फ़ कुछ ही इलाक़ों में 25 ज़िलों तक सीमित कर दिया गया है जो कि देश के कुल वामपंथी उग्रवाद की 85% हिंसा के लिए ज़िम्मेदार हैं।

बेहतर स्थिति के कारण, एसआरई जिलों की संख्या की पिछले तीन वर्षों में दो बार समीक्षा की गई, जो अप्रैल, 2018 में 126 ज़िलों से घटकर 90 और फिर जुलाई, 2021 में 70 हो गए। सबसे अधिक वामपंथी उग्रवाद प्रभावित ज़िलों की संख्या भी अप्रैल, 2018 में 35 से घटकर 30 और फिर जुलाई, 2021 में इसे और कम करके 25 कर दिया गया।

वामपंथी उग्रवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई अब महत्वपूर्ण चरण में है और सरकार जल्द ही इस ख़तरे को बेहद कम करने के प्रति आशान्वित है।

वामपंथी आतंकवाद के भौगोलिक प्रसार में कमी की बात नोट की गई है। मीटिंग में जो तथ्य प्रस्तुत किए गए वे तथ्य इस कमी को ही दर्शाते हैं। 


इसी तरह वामपंथी उग्रवाद संबंधी घटनाएं भी लगातार कम होती जा रही हैं। सरकार इस दिशा में भी पूरी तरह से अग्रसर है। 


इस कमी के परिणामस्वरूप मौतें भी कम हो रही हैं। गौरतलब है की नक्सल अभियान में बहुत सी अनमोल जानें जा चुकी हैं। 


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एनडब्ल्यू  / आरके / एवाई / आरआर

Sunday, May 26, 2013

नक्सलवादी हमले पर देश भर में व्यापक प्रतिक्रिया

प्रधानमन्त्री ने दिए सख्ती के संकेत 
नक्सलबाड़ी आन्दोलन से जुड़े संगठनों की ओर  से कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर हुए हमले से एक बार फिर सार देश सन्न रह गया है। हर ओर से इस हमले की निंदा जारी है। इसी बीच प्रधानमन्त्री ने इस मामले में नयी सख्ती के संकेत भी दिए हैं। राहुल गाँधी सोनिया गन्दी उप राष्ट्रपति मोहम्मद  हामिद अंसारी और प्रधानमन्त्री सहित सभी ने इस पर ब्यान दिए हैं।
देश और दुनिया को हिला कर रख देने वाले वाले बड़े और सुनियोजित हमले पर देश भर में तीखी प्रतिक्रिया का सिलसिला जारी है। उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने इसे कायरतापूर्ण बताते हुए कहा है कि किसी भी सभ्य समाज में इस तरह के बर्बर और सम्वेदना हीन हमलों की कोई जगह नहीं होती।इसी बीच प्रधानमन्त्री डाक्टर मनमोहन सिंह और राष्ट्रिय सलाहकार परिषद की चेयरपर्सन
सोनिया गाँधी अपनी सभी व्यस्ततायों को बीच में ही छोड़ कर रायेपुर पहुँच गये।
बस्तर में कल हुए माओवादी हमले पर उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने कहा कि वे इस कायरतापूर्ण हमले की निंदा करते हैं जिसमें कई निर्दोष मारे गए जबकि कई अन्य घायल हो गये। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में ऐसे संवेदनाहीन और बर्बर कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं है। श्री अंसारी ने कहा कि चरमपंथ और हिंसा के सभी पक्षों से मुकाबला किया जाना चाहिए और उन्हें अपने बीच से मिटा देना चाहिए। 
इस हमले में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी शोक संवेदनाएं प्रकट करते हुए श्री अंसारी ने घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की भी कामना की। उप राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी भावनाएं और प्रार्थनाएं इस कठिन समय में उनके साथ हैं। श्री अंसारी ने कहा कि ईश्वर उन्हें इस दुःख से उबरने में साहस और धैर्य प्रदान करे। 
प्रधानमंत्री ने नक्सली हमले में घायल हुए लोगों से मुलाकात की, पीड़ित परिवारों को सहायता और अपराधियों को सज़ा दिलाने का संकल्प जताया प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कल छत्तीसगढ़ में हुई हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के साथ रायपुर अस्पताल का दौरा करके घटना में घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की। 
प्रधानमंत्री इस नृशंस हमले की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं से हिंसा के खिलाफ लड़ाई में देश की दृढ़ता में कमजोरी नहीं आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस हमले के जिम्मेदार अपराधियों को जल्द ही कानून के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने देश को आश्वासन भी दिया कि सरकार अपराधियों को सज़ा दिलाने के प्रति वचनबद्ध है। 
उन्होंने राज्य प्रशासन से घायलों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा उपचार देने को कहा। डॉ. मनमोहन सिंह ने घटना में मारे गए लोगों के परिवारों को प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष से पांच लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। 
प्रधानमंत्री ने राज्य के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ में सुरक्षा स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने स्थिति से निपटने के लिए राज्य को हर संभव सहायता देने का भी आश्वासन दिया। 
डॉ मनमोहन सिंह ने कहा कि इस तरह के बर्बर कृत्य करने वाले अपराधी क्षेत्र में विकास और शांति के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। 
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की निंदा की। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की निंदा की है। प्रधानमंत्री के संदेश का अनूदित पाठ इस प्रकार है: 
"मैं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हिंसक हमले की कड़ी निंदा करता हूं। मैं उन लोगों के परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट करता हूं जिन्होंने अपनी जान कुर्बान कर दी। मैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री विद्याचरण शुक्ल सहित इस कायरतापूर्ण हमले में घायल लोगों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार के लिए दुआ करता हूं। 
मैंने राज्य के मुख्यमंत्री से बात की है और उनसे अनुरोध किया है कि घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा अपहृत लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। 
मैं हमलावरों से अपील करता हूं कि अपहृत लोगों को जल्द से जल्द छोड़ दें। 
ऐसी घटनाएं हमारे देश के लोकतांत्रिक मूल्यों के विरूद्ध हैं। सरकार किसी भी तरह की हिंसा के दोषी लोगों पर कड़ी कार्रवाई करेगी।" 
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Related Links:

सरकार के विरूद्ध युद्ध की तैयारी कर रहे नक्‍सलवादी                                 लाल सलाम 




Wednesday, February 6, 2013

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन

05-फरवरी-2013 20:24 IST
केन्‍द्र ने दी नक्‍सल प्रभावित जिलों में चौमुखी संपर्क को मंजूरी
सरकार ने नक्‍सल प्रभावित जिलों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन चौमुखी संपर्क कायम करने को अपनी मंजूरी दे दी है। केन्‍द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम नरेश ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि राज्‍यों की सरकारें दो चरणों में विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर सकती हैं। राज्‍य सरकारें ढांचे का निर्माण, ग्रेवल बेस आदि का निर्माण पहले चरण के अधीन कर सकती हैं, जबकि दूसरे चरण में बिटुमिनस अथवा कंक्रीट की सतह तैयार करना शामिल है। उन्‍होंने कहा कि राज्‍यों को पहले चरण का कार्य पूरा करने की अनुमति दी जाएगी और कानून व्‍यवस्‍था को ध्‍यान में रखते हुए मार्च 2015 से पहले दूसरे चरण के लिए विस्‍तृत परियोजना रिपोर्ट भेजने के लिए कहा जाएगा। 

नक्‍सल प्रभावित 82 जिले के 52,000 आवास स्‍थलों में से 30,000 आवास स्‍थलों को इसमें शामिल किया गया है, किंतु अब तक केवल 19,000 आवास स्‍थलों को ही सड़कों से जोड़ा गया है।(PIB)
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वि.कासोटिया/सुधीर/मनोज-450
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधीन

Thursday, January 10, 2013

माओवादियों के गढ़ों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए:शिंदे

10-जनवरी-2013 19:11 IST                                                  पत्रकार सम्‍मेलन में गृह मंत्री का वक्‍तव्‍य
माओवादी इस क्षेत्र में दशकों से जमे तथा इस भू-भाग से परिचित 
लड़ाई बहुत कठिन होने की संभावना:गृह मन्त्रालय का रिपोर्ट कार्ड
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे ने दिसम्बर-2012 के लिए गृह मन्त्रालय का रिपोर्ट कार्ड एक पत्रकार सम्मेलन में 10 जनवरी-2013 को नई दिल्ली में प्रस्तुत किया। उनके साथ नजर आ रही हैं पत्र सूचना कार्यालय की प्रिसिपल डायरेक्टर जनरल (एम एंड सी) सुश्री नीलम कपूर (फोटो:पी आई बी )
सेना और सुरक्षा बलों ने दिसम्‍बर, 2012 में संयुक्‍त अभियानों में जम्‍मू एवं कश्‍मीर में सक्रिय 14 आतंकवादियों (8 विदेशी आतंकवादियों सहित) का खात्‍मा किया जिससे आतंकवादियों को काफी नुकसान हुआ। इसमें सुरक्षा बलों के विरुद्ध विभिन्‍न हमलों में शामिल नौ उग्रवादी (2 स्‍थानीय उग्रवादी तथा 7 विदेशी उग्रवादी) शामिल थे जो श्रीनगर सिटी में हमले की योजना बना रहे थे। मारे गए दो उग्रवादी (पम्‍पोरी में सेना के काफिले पर हमले में शामिल एक विदेशी आतंकवादी सहित) होटल सिल्‍वर स्‍टार गोलीबारी में शामिल थे। मारे गए उग्रवादियों में दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय विस्‍फोट मामले में वांछित हिजबुल मुजाहिद्दीन का एक स्‍थानीय कमांडर भी शामिल था।

2.   दिसम्‍बर 2012 माह के दौरान राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी ने वर्ष 2006 में मालेगांव में, फरवरी, 2007 में समझौता एक्‍सप्रेस में और मई 2007 में मक्‍का मस्जिद, हैदराबाद में तथा सितम्‍बर 2008 में मालेगांव में बम विस्‍फोट की घटनाओं में शामिल चार अभियुक्‍तों को गिरफ्तार किया। इन चार अभियुक्‍तों में से राजेन्‍द्र चौधरी, धन सिंह और मनोहर मालेगांव में बम रखने में शामिल थे; राजेन्‍द्र चौधरी और तेजराम ने हैदराबाद में मक्‍का मस्जिद में बम रखे थे तथा धन सिंह मालेगांव में बम विस्‍फोट में शामिल था।

    पूछताछ के दौरान इन अभियुक्‍तों ने पता न लगे तीन सनसनीखेज पुराने अपराधों अर्थात् (i) उज्‍जैन के नरवर पुलिस थाने में एक महिला नन (लीना) पर गोली चलाकर उसे घायल करने,  (ii) 9 जनवरी, 2004 को जम्‍मू में एक मस्जिद पर ग्रेनेड फेंकने, जिसमें दो व्‍यक्तियों की मृत्‍यु हो गई तथा 15 अन्‍य घायल हो गए,  (iii) फरवरी 2005 में नई दिल्‍ली में ‘’एस. ए. आर गिलानी’’ (संसद हमला मामले में वरी अभियुक्‍त) पर गोली चलाने, (iv) उज्‍जैन (मध्‍य प्रदेश) में एक पठान मुजीव लाला की हत्‍या करने तथा  (v) रमेश निनामा (इंदौर के पियर सिंह निनामा की हत्‍या के मामले में एक प्रमुख गवाह) की हत्‍या करने में अपनी भूमिकाएं स्‍वीकार कर लीं।

3.   केन्‍द्रीय लोक निर्माण विभाग, भोपाल द्वारा केन्‍द्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, भोपाल का निर्माण किए जाने के लिए 7 दिसम्‍बर, 2012 को 281 करोड़ रुपये की राशि की स्‍वीकृति जारी की गई है। यह अकादमी सीधी भर्ती से नियुक्‍त होने वाले राज्‍यों के पुलिस उपाधीक्षकों तथा अपर पुलिस अधीक्षकों को बुनियादी प्रशिक्षण प्रदान करेगी तथा हमारे मित्र देशों की प्रशिक्षण आवश्‍यकताओं का निराकरण करेगी।
4.   दिनांक 4 दिसम्‍बर, 2012 को बंगलादेश सरकार के गृह मंत्री डॉ. मुहीउद्दीन खान आलमगीर ने मुझसे मुलाकात की तथा सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद के खतरे का निवारण करने के लिए पार‍स्‍परिक सहयोग आदि से संबंधित द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। सीमा पार से चलने वाली अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण लगाने के लिए दोनों देशों के बीच हस्‍ताक्षरित समन्वित सीमा प्रबंधन योजना (सी बी एम पी) पर सहयोग बढ़ाने पर हमारी सहमति हुई, हमने सुरक्षा संबंधी मामलों पर सूचना का आदान-प्रदान करने के लिए नोडल पॉइंट्स के कार्य संचालन की समीक्षा की तथा हमने जीरो लाइन के 150 गज के भीतर विकास कार्य की अनुमति देने पर सहमति व्‍यक्‍त की। हम संशोधित यात्रा करार और प्रत्‍यर्पण संधि को अंतिम रूप देने तथा उस पर जनवरी 2013 में हस्‍ताक्षर करने के लिए सहमत हो गए। गृह मंत्री स्‍तर की अगली वार्ता 28 से 30 जनवरी, 2013 के दौरान ढाका में आयोजित की जाएगी।

5.   12 दिसम्‍बर, 2012 को नाईजीरिया के माननीय मिनिस्‍टर ऑफ इंटीरियर श्री अब्‍बा मोरो ने मुझसे मुलाकात की और आप्रवासन तथा वीजा संबंधी मुद्दों पर चर्चा की।
6.   दिनांक 14 दिसम्‍बर, 2012 से 16 दिसम्‍बर, 2012 तक पाकिस्‍तान के इंटीरियर मिनिस्‍टर श्री रहमान मलिक द्विपक्षीय वार्ता के लिए भारत दौरे पर आए। आतंकवाद को पाकिस्‍तान के निरंतर सहयोग और पाक अधिकृत कश्‍मीर में आतंकवादी शिविरों के संचालन, मुंबई आतंकवादी हमले के प्रमुख मास्‍टर माइंड व्‍यक्तियों के अभियोजन तथा विचारण, मुंबई आतंकी हमले के षड़यंत्रकारियों तथा 1993 के मुंबई बम विस्‍फोटों के भगोड़ों को कानून के अंतर्गत सजा दिलाने, नियंत्रण रेखा तथा अंतर्राष्‍ट्रीय सीमाओं के पार से गोलीबारी, आतंकवाद के वित्तपोषण, जाली भारतीय करेंसी नोट, पाकिस्‍तान में मछुआरों तथा सिविलियन कैदियों और भारत के युद्ध बंदियों की रिहाई, वीजा और कंसूलर मुद्दों, स्‍वापक तथा मादक द्रव्‍यों की तस्‍करी तथा भारत और पाकिस्‍तान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर करने और उसका अनुसमर्थन करने तथा एम एल ए टी एवं प्रत्‍यर्पण संधि आदि मुद्दों पर चर्चा की गई।

7.   8 सितम्‍बर, 2012 को भारत तथा पाकिस्‍तान सरकारों के बीच हस्‍ताक्षरित नए वीजा करार को भारत के माननीय गृह मंत्री तथा पाकिस्‍तान के माननीय इंटीरियर मिनिस्‍टर द्वारा 14 दिसम्‍बर, 2012 को नई दिल्‍ली में क्रियाशील बनाया गया।

8.   19 दिसम्‍बर, 2012 को संयुक्‍त राष्‍ट्र शरणार्थी उच्‍चायुक्‍त श्री एन्‍टोनिओ गुटरेस ने मुझसे मुलाकात की और शरणार्थियों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की।

आंतरिक सुरक्षा
9.   26/11 के मुंबई आतंकी हमले के मामले में पाकिस्‍तान में गिरफ्तार अभियुक्‍त के विचारण के संबंध में पाकिस्‍तान के न्‍यायिक आयोग के दूसरे प्रस्‍तावित दौरे के संशोधित विचारार्थ विषयों को अंतिम रूप देने के लिए चार सदस्‍यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 20 से 26 दिसम्‍बर, 2012 तक पाकिस्‍तान का दौरा किया।
10.  20 दिसम्‍बर, 2012 को विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) संशोधन विधेयक, 2011 राज्‍य सभा द्वारा पारित किया गया। यह विधेयक लोक सभा द्वारा 30/11/2012 को पहले ही पारित कर दिया गया था।

11.   राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच के दौरान इकट्ठे किए गए साक्ष्‍यों की स्‍वतंत्र रूप से समीक्षा करने तथा इन मामलों में निर्धारित समय के भीतर आरोप पत्र दायर करने की सिफारिश करने के प्रयोजन से विधि-विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के अंतर्गत गठित ‘’प्राधिकरण’’ का 31 दिसम्‍बर, 2013 तक विस्‍तार किया गया है।

कश्‍मीर संबंधी मामले
12.  परियोजना मूल्‍यांकन समिति की 13वीं बैठक 19 दिसम्‍बर, 2012 को आयोजित हुई जिसमें विशेष उद्योग पहल योजना के अंतर्गत 25 उम्‍मीदवारों को प्रशिक्षित करने के लिए बजाज अलियांज तथा 50 उम्‍मीदवारों को प्रशिक्षित करने के लिए आइकॉन सेंट्रल लेबोरेट्रीज के प्रस्‍तावों को अनुमोदित किया गया।

पूर्वोत्‍तर
13.  कार्रवाई स्‍थगन के बारे में कुकी नेशनल आर्गेनाइजेशन (के एन ओ), यूनाइटेड पीपल्‍स फ्रंट (यू पी एफ) तथा मणिपुर के अम्‍ब्रेला संगठनों के साथ नई दिल्‍ली में 5 दिसम्‍बर, 2012 को त्रिपक्षीय बैठकें आयोजित की गईं। यू पी एफ के साथ कार्रवाई स्‍थगन करार को नौ माह तक बढ़ा दिया गया है किंतु कुकी नेशनल आर्गेनाइजेशन (के एन ओ) के साथ कार्रवाई स्‍थगन का और विस्‍तार किए जाने के बारे में कोई समझौता नहीं हो सका।

14.  उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण के भाग के रूप में पूर्वोत्‍तर में भूमिगत संगठनों की गतिविधियों की समीक्षा की गई तथा हिन्‍नीवट्रेप नेशनल काउंसिल (एच एन एल सी), यूनाटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्‍फा) तथा नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एन डी एफ बी) को विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के अंतर्गत विधिविरुद्ध संगम (2 वर्ष तक) घोषित करने संबंधी अधिसूचनाएं जारी की गईं।

केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बल
15.  भूमि के अधिग्रहण के लिए केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों को 25 करोड़ रु. की राशि स्‍वीकृत की गई है तथा कार्यालय/रिहायशी भवनों के निर्माण के लिए भी उनको 357 करोड़ रु. की राशि स्‍वीकृत की गई है।

आपदा प्रबंधन
16.  देश के विभिन्‍न भागों में कार्रवाई करने तथा राहत गतिविधियां चलाने के लिए नौकाओं, वाहनों तथा अपेक्षित उपकरणों सहित राष्‍ट्रीय आपदा कार्रवाई बल के 614 कार्मिक तैनात किए गए। राष्‍ट्रीय आपदा कार्रवाई बल के कार्मिकों ने राज्‍य सरकारों के प्राधिकारियों के समन्‍वय से कार्य किए तथा 16 लोगों की जान बचाई और 18 शव निकाले।

नक्‍सल प्रबंधन
17.  विशेष रैली आयोजित करके वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में रिक्तियों को भरने के लिए केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों में कांस्‍टेबलों की भर्ती के मुद्दे पर
चर्चा करने के लिए गृह सचिव ने 4 दिसम्‍बर, 2012 को केन्‍द्रीय सशस्‍त्र पुलिस बलों के महानिदेशकों के साथ एक बैठक की अध्‍यक्षता की।

18.  10 अक्‍तूबर, 2012 को केन्‍द्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक सेवानिवृत्त महानिदेशक श्री के. विजय कुमार को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास संबंधी मामलों पर सलाह देने के लिए वरिष्‍ठ सुरक्षा सलाहकार नियुक्‍त किया गया है।

19.  सुरक्षा बलों ने झारखंड के लातेहर जिले में माओवादियों के गढ़ों में बड़े पैमाने पर अभियान चलाए हैं। यह लड़ाई बहुत कठिन होने की संभावना है क्‍योंकि माओवादी इस क्षेत्र में दशकों से जमे हुए हैं तथा इस भू-भाग से परिचित हैं। इस क्षेत्र में हाल ही में हुई गोलीबारी से दस सुरक्षा कार्मिक शहीद हो गए तथा कुछ घायल हो गए। आसूचना संबंधी जानकारी से यह पता चला है कि माओवादियों को भी बहुत क्षति पहुंची है। यह अभियान इस क्षेत्र से माओवादियों का सफाया होने तक जारी रहेंगे।

विदेशी विषयक
20.  माह के दौरान पैराग्‍वे (चैक रिपब्लिक); नैरोबी (कीनिया) तथा मपुतो (मोजाम्बिक) में स्थित भारतीय दूतावासों में आई वी एफ आर टी के अंतर्गत इंटीग्रेटिड ऑनलाइन वीजा एप्‍लीकेशन प्रणाली शुरू की गई है। यह सुविधा अब विदेशों में स्थित 101 भारतीय मिशनों में उपलब्‍ध है।

21.  विदेशी छात्रों के कल्‍याण के बारे में तथा उनकी गतिविधियों/निष्‍पादन और सामान्‍य आचरण पर नजर रखने के लिए आई वी एफ आर टी के अंतर्गत विदेशी छात्र सूचना प्रणाली (एफ एस आई एस) विकसित की गई है ताकि संबंधित शैक्षणिक संस्‍थानों द्वारा विदेशी छात्रों के विवरण को ऑनलाइन भरने में सुविधा हो सके। यह मॉड्यूल प्रयोग के तौर पर एफ आर आर ओ चैन्‍नई में शुरू किया गया है।

संघ राज्‍य क्षेत्र
22.  यौन उत्‍पीड़न मामलों में 30 दिन के भीतर त्‍वरित न्‍याय तथा निवारक दंड की व्‍यवस्‍था करने के लिए दंड कानूनों में संभावित संशोधनों की जांच करने के लिए सरकार ने 24 दिसम्‍बर, 2012 को न्‍यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जे. एस. वर्मा समिति का गठन किया।

23.  दिल्‍ली में हाल ही में घटित सामूहिक बलात्‍कार की दु:खद घटना के बारे में सरकार ने 26 दिसम्‍बर, 2012 को न्‍यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) उषा मेहरा जांच आयोग का भी गठन किया।

24.  कल मैंने दिल्‍ली में कानून एवं व्‍यवस्‍था की स्थिति की दिल्‍ली पुलिस के साथ समीक्षा की। हमने इस बारे में निम्‍नलिखित निर्णय लिए हैं :-
क) दिल्‍ली पुलिस के कार्मिकों द्वारा रात्रि में मोटरसाइकिल पर गश्‍त लगाना;

ख) प्रत्‍येक पुलिस थाने में महिला हेल्‍प डैस्‍क-पुलिस थाना क्षेत्र में सभी स्‍कूलों और कॉलेजों में महिला हेल्‍प डैस्‍क का सैल नंबर तथा टेलीफोन नंबर अधिसूचित किया जाना होगा; और

ग) सिविल रक्षा कार्मिकों, होमगार्ड, भूतपूर्व सैनिकों तथा महिला गैर सरकारी संगठनों को शामिल करके प्रत्‍येक पुलिस थाने में समितियों का गठन किया जाए ताकि जनता, विशेष रूप से महिलाओं से संबंधित मुद्दों को बातचीत के दौरान पुलिस अधिकारियों के समक्ष लाया जा सके।

राज्‍य विधायन
25.  भारत के राष्‍ट्रपति ने दिसम्‍बर, 2012 में असम राज्‍य सतर्कता आयोग विधेयक, 2010; राजस्‍थान विशेष न्‍यायालय विधेयक, 2012;  उत्तर प्रदेश

राजस्‍व संहिता विधेयक, 2006 तथा भारतीय स्‍टाम्‍प (पश्चिम बंगाल संशोधन) विधेयक, 2012 को मंजूरी प्रदान की।

हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को विशेष दर्जा
26.  हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र, जिसमें गुलबर्गा, बिदर, रायचूर, कोपल और यादगीर जिले शामिल हैं तथा कर्नाटक राज्‍य में बेल्‍लारी जिला अतिरिक्‍त रूप से शामिल है, को विशेष दर्जा प्रदान करने के लिए एक नया अनुच्‍छेद 371 (ञ)
अंत:स्‍थापित करने के लिए संसद के दोनों सदनों द्वारा संविधान (संशोधन) विधेयक, 2012 पारित कर दिया गया है।

सीमा प्रबंधन
27.  दिसम्‍बर, 2012 माह के दौरान भारत बंगलादेश सीमा के 40 किलोमीटर भाग पर तेज रोशनी करने का कार्य पूरा कर लिया गया।

28.  तटीय सुरक्षा के अंतर्गत 131 तटीय पुलिस थानों में से 116 के लिए भूमि के निर्धारण को अंतिम रूप दे दिया गया है तथा दिसम्‍बर 2012 तक 74 मामलों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तटीय राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा 60 में से 27 घाटों के लिए भूमि का निर्धारण कर लिया गया है।

29.  सरकार ने भारत-चीन सीमा पर भारत-तिब्‍बत सीमा पुलिस की कुल 804 किलोमीटर लम्‍बी 27 प्राथमिकता सड़कें स्‍वीकृत की हैं जिनमें से दिसम्‍बर 2012 तक 562 किलोमीटर लम्‍बी सड़कों का फॉर्मेशन कार्य तथा 241 किलोमीटर लम्‍बी सड़कों के समतलीकरण का कार्य पूरा कर लिया गया है।  (PIB) पत्रकार सम्‍मेलन में गृह मंत्री का वक्‍तव्‍य
वि.कासोटिया / श्‍याम – 139

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Wednesday, January 9, 2013

वाम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सर्व शिक्षा अभियान

08-जनवरी-2013 19:40 IST
नक्‍सल ग्रस्‍त इलाकों में बच्‍चों को शिक्षित करना
   विशेष लेख                                                                 * सरिता बरारा
Photo Courtesy: Janokti
हाल ही में सम्‍पन्‍न संसद के शीतकालीन सत्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री  ने बताया था कि देश के वाम उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सर्व शिक्षा अभियान शुरू करने के बाद से छात्रों के स्‍कूल छोड़ने की गति में काफी कमी आई है जो एक अच्‍छा संकेत है। वाम उग्रवाद प्रभावी क्षेत्रों में बच्‍चों को स्‍कूल से जोड़ने के लिए केंद्र और संब‍ंधित राज्‍य सरकारों ने बीते वर्षों में कई कदम उठाए हैं। इससे स्‍कूलों से बच्‍चों को जोड़े रखने में काफी हद तक सफलता मिली है और स्‍कूल छोड़ने वालों बच्‍चों की संख्‍या में काफी कमी आई है।
केंद्र सरकार की पहल और मदद
     स्‍कूलों में बच्‍चों को बनाए रखने में आवासीय स्‍कूलों का खुलना काफी प्रभावी तरीका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वाम उग्रवाद प्रभावी जिलों में 77 आवासीय स्‍कूल/छात्रावास हैं जिनमें 31650 बच्‍चे पढ़ रहे हैं। प्रभावित जिलों में कक्षा 6 से लेकर 8 तक के लिए 889 कस्‍तूरबा गांधी विद्यालय आवासीय स्‍कूल लड़कियों के लिए खोले गए हैं।
     जनजातीय मामलों के मंत्रालय की एक योजना के प्रावधानों के तहत गृह मंत्रलय द्वारा चिन्हित नक्‍सल प्रभावित जिलों में अनुसूचित जनजाति बालिका आश्रम स्‍कूल और बाल आश्रम स्‍कूलों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से 100 फीसदी आर्थिक मदद मिलती है। इन स्‍कूलों में पढ़ने वाले बच्‍चों को मुफ्त किताबों सहित कई जरूरी चीजें मुहैया कराई जाती हैं।
     उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासी जिलों में शिक्षा के प्रारंभिक स्‍तर पर बहुभाषिक शिक्षा मुहैया कराना एक अन्‍य पहल है जिससे बच्‍चों के सीखने की समझ बढ़ती है और स्‍कूलों में उनकी उपस्थिति बरकरार रहती है।
     केंद्र सरकार ने स्‍कूल छोड़ चुके छात्रों या कभी स्‍कूल नहीं गए बच्‍चों के लिए विशेष प्रशिक्षण की भी व्‍यवस्‍था की है। सरकार ने इसके लिए 33280 लाख रूपये स्‍वीकृत किए हैं। वर्ष 2011-12 और वर्ष 12012-13 के लिए वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों में 47909 बच्‍चों के स्‍कूल लाने- ले जाने की सुविधा भी उपलब्‍ध कराई है। केंद्र सरकार का वाम उग्रवाद प्रभावित जिलों पर विशेष ध्‍यान है और इनके लिए विशेष योजनाएं बनाई जाती हैं।
महाराष्‍ट्र में केजी से लेकर पीजी तक शिक्षा केंद्र
    महाराष्‍ट्र सरकार नक्‍सली हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों के आदिवासी छात्रों के लिए ''केजी से पीजी'' शिक्षा केंद्र खोलने जा रही है जहां प्रारंभिक स्‍तर से स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर तक पढ़ाई होगी। इसका उद्देश्‍य आदिवासी समुदायों को मुख्‍य धारा से जोड़ना है।
छत्‍तीसगढ़ में पोर्टा केबिन स्‍कूल
    छत्‍तीसगढ़ में राज्‍य सरकार ने बस्‍तर क्षेत्र के सभी जिलों में पोर्टा केबिन स्‍कूल शुरू किए हैं। स्‍कूलों के निर्माण में काफी समय लगते देख सरकार ने ऐसे स्‍कूलों की शुरूआत की है जिसका इस्‍तेमाल उन इलाकों में भी किया जा सकेगा जहां नक्‍सलियों ने पहले से मौजूद स्‍कूलों को क्षतिग्रस्‍त कर दिया हो या जहां स्‍कूल हैं ही नहीं। छत्‍तीसगढ़ में पोर्टा केबिन स्‍कूल योजना को यूनिसेफ की मदद से लागू किया जायेगा और ऐसे स्‍कूलों के लिए झारखंड सरकार ने भी कोष मंजूर कर लिया है।
राष्‍ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का बालबंधु कार्यक्रम

दो साल पहले प्रभावित क्षेत्रों में राष्‍ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एन सी पी सी आर) द्वारा शुरू की गयी नवीन बालबंधु योजना का प्रभाव पड़ने लगा है। इस योजना को नक्‍सल प्रभावित 9 जिलों में शुरू किया गया जिनमें छत्‍तीसगढ़ में सुखमा, महाराष्‍ट्र के गढ़चिरौली, आंध्र प्रदेश के खम्‍माम, बिहार के श्‍योहार, जम्‍मुई एवं रोहतास तथा असम के कोकराझार एवं चिरांग शामिल हैं। बालबंधु ऐसे नवयुवक हैं जिन्‍हें समुदाय के भीतर से भर्ती किया गया है। जिनका कार्य ऐसे क्षेत्रों के बच्‍चों की देखरेख करना है कि वें स्‍कूलों में जाये और यदि उन्‍होंने स्‍कूल जाना छोड़ दिया है तो वें स्‍कूल में वापस आयें और जो बच्‍चें खो गये हैं उन्‍हें, उनके परिवारवालों से मिलाएं। यद्यपि बाल बंधुओं को इन्‍हें लागू करने की शक्तियां प्राप्‍त नहीं हैं किंतु वे इस कार्य के लिए पंचायतों तथा समुदायों को शामिल करते हुए अधिकारियों पर अपना दबाव बना सकते हैं। बालबंधु कार्यक्रम की मूल्‍यांकन रिपोर्ट से यह पता चलता है‍ कि इन भर्ती किए गए युवा बालबंधुओं का बच्‍चों के आत्‍म विश्‍वास खासकर स्‍कूल जाने वाले बच्‍चों पर खास प्रभाव पड़ा है।

     बालबंधु कार्यक्रम के बारे में दिए गए अन्‍य सुझावों, सिफारिशों में यह दर्शाया गया है कि इस कार्यक्रम को उसी खंड में कम से कम दो वर्षों के लिए और विस्‍तार किया जाना चाहिए। तथा नजदीकी जिलों के नए खंडों में इस अपनाया जाए। जहां वर्तमान कुशल व्‍यक्ति तथा बालबंधु मूलभूत परिचालन प्रशिक्षण प्रदान करे।

स्‍वयं सहायता समूह तथा बालबंधु समिति दोपहर के खाने की योजना की निगरानी रखे तथा इसकी नियमित रिपोर्ट प्रेषित करें।

विद्यार्थियों को स्‍वयं सहायता समूह बनाने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाना चाहिए और जो विद्यार्थी पढ़ने में अच्‍छे हैं वे कमजोर विद्यार्थियों की सहायता करें। एनसीपीसीआर की अध्‍यक्ष डॉ शांता सिन्‍हा के अनुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम से सकारात्‍मक परिणाम प्राप्‍त हुए हैं और इनके नामांकन में वृद्धि हुई है। फिर भी प्रभावित क्षेत्रों में काफी कुछ किया जाना बनता है। उन्‍होंने बताया कि यह कार्य धीमी गति से चल रहा है और जहां इस कार्य में अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त हुए हैं उसे अन्‍य स्‍थान पर दोहराये जाने की आवश्‍यकता है।

राष्‍ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने यह कहा है कि हिंसा, असहिष्‍णुता, गैर-बराबरी के लिए शिक्षा रामबाण की तरह है। हाल ही में छत्‍तीसगढ़ के जिलों में जनजातीय विद्यार्थियों के दो अलग-अलग छात्रावासों के लिए आधारशिला रखने के बाद उन्‍होंने कहा कि युवाओं के मन में मानवता के प्रति विश्‍वास बनाये रखना चाहिए जिससे कि विश्‍व में देश को सही स्‍थान मिल सके।              (पीआईबी फीचर)
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लेखिका स्‍वतंत्र पत्रकार हैं।
डिस्‍कलेमर: इस फीचर में व्‍यक्‍त किए गए विचार लेखक के अपने हैं।

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वि.कासोटिया/अनिल /यादराम/मलिक/निर्मल-10


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